Podcast PuliyaBaazi

टिकट ख़रीदा रिज़र्व बैंक ने पर क्या लॉटरी लगेगी सरकार की?

This is Episode 40 of PuliyaBaazi, a fortnightly podcast hosted by Pranay Kotasthane and Saurabh Chandra.

The tussle between the Reserve Bank of India and the Union government has only intensified over the last two years. Governor Urjit Patel resigned in December 2018 and Deputy Governor Viral Acharya resigned earlier this week. Though both of them cited personal reasons there are speculations that the stand-off related to excess funds on RBI’s balance sheet had some role to play.

Now there’s nothing new about tensions between a government and a central bank but what’s new is the bone of contention itself because it involves surplus funds rather than disputes over interest rates. There are no set templates from other countries to be followed here. Many central banks are yet to narrow down on the best possible use of such surplus funds and hence the RBI has constituted a committee under former Governor Bimal Jalan to recommend the way ahead.

So we took a step back and tried to: explore the history of India’s Reserve Bank, uncover the relationship between the Reserve Bank and the government, and ideate on possible solutions to the current stand-off. 

Our guest in the episode helping us navigate these choppy waters is Harsh Vora, an investor and trader from Vadodara. Harsh is an alumnus of Takshashila’s Postgraduate Programme in Public Policy and writes on financial matters for Mint

 

आर्थिक मामलों में कम ही ऐसे मौके आते है जब किसी सरकार की एकाएक लॉटरी खुल जाती है और उसके पास आर्थिक तंगी की बजाए यह सवाल खड़ा हो जाता है कि इस बोनस को किस पर खर्च किया जाए | ऐसा ही एक ऐतिहासिक मौका भारत की रिज़र्व बैंक के सामने आया है | 

हुआ यह है कि रिज़र्व बैंक के पूंजी भण्डार में लाखों करोड़ रुपए जमा हो चुके है | और वित्त मंत्रालय चाहता है कि बैंक सरकार को अधिशेष पूंजी सौंप दे जिससे सरकार इस रक़म का अपनी मर्ज़ी से उपयोग कर सके | दुसरी ओर कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस पूंजी को हाथ नहीं लगाना चाहिए क्योंकि खराब वित्तीय हालत में यह पूँजी दवाई का काम करेगी |  

तो हमने इस अवसर का फायदा उठाते हुए चर्चा की रिज़र्व बैंक और सरकार के रिश्तों के बारे में हर्ष वोरा के साथ जो एक इन्वेस्टर और ट्रेडर है | हर्ष तक्षशिला इंस्टीटूशन के पब्लिक पालिसी पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम से उत्तीर्ण हुए है और मिंट अखबार में आर्थिक मामलों पर एक कॉलम भी लिखते है |

इस पुलियाबाज़ी में हमने चर्चा की इन सवालों पर:

  1. रिज़र्व बैंक एक साथ कई रोल अदा कर रहा है – बैंक को रेगुलेट करना, सरकार की लेन-देन, विनिमय दर (exchange rate) मैनेज करना इत्यादि | ऐसे और क्या क्या रोल है जो RBI कर रही है?
  2. सरकार और रिज़र्व बैंक के रिश्ते का इतिहास कैसा रहा है? १९९२ से पहले क्या स्थिति थी? आज क्या है?
  3. रिज़र्व बैंक की बैलेंस शीट बड़ी कष्टमय है, क्या-क्या पुरज़े है इसके?
  4. रुपए की क़ीमत गिरने से RBI की झोली में पैसा बढ़ रहा है – क्या यह कहना ठीक है?
  5. आपदा के लिए रिज़र्व बैंक के पास जो पैसा है यह मात्रा काफी ज़्यादा है – क्या यह कहना ठीक है?
  6. इस झमेले को भविष्य में कैसे सुलझाना चाहिए? इस अतिरिक्त राशि का सबसे बेहतरीन उपयोग क्या है?

Also check out:

  1. Understanding RBI’s Balance Sheet: Is It Sitting On Excess Capital?, BloombergQuint
  2. The Raid on the RBI Balance Sheet, Niranjan Rajadhyaksha, Mint
  3. If Keynes Had Designed India’s Central Bank, Rohan Chinchwadkar, Mint
  4. Ambedkar, Rupee, and our Current Troubles, Niranjan Rajadhyaksha, Mint

 

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